स्व परिवर्तन
१. स्व परिवर्तन की यह यात्रा ,हम हर की अपनी -अपनी है ,इसमें किसी की अन्य के साथ न कोई तुलना करना है और न ही कोई प्रतियोगिता ...इस यात्रा में हमारा पूरा ध्यान केवल खुद के ऊपर रहता है ,अपने को बेहतर बनाने का रहता है।
२. प्रेम जो है ,वो हर बात को लेता ही सकारत्मक है। मोह (अटैचमेंट )जो है वो सकारत्मक में भी नकारत्मक निकल लेता है।

1 comment:
Don't compare yourself right msg
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