कैसा जीवन
ऊपर वाले ने आपको ये अधिकार
दे रखा है स्वेच्छा दे रखा है ,की
आपको जीवन कैसे जीना है ,और
उसने ये नियम बांध रखा है की
जैसा जीवन जिओगे वैसे परिणाम भुगतोगे।
अब सब आपके हाथ में है की कैसा जीवन जीते हो।
ज़िंदगी जी किस आधार पर रहे हो? जीवन में भी कोई विशेष कर्म पाप नहीं कहला सकता और कोई विशिष्ट कर्म पुण्य भी नहीं कहला सकता। सही -गलत का ,अच्छ...
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