Sunday, October 10, 2021

ज़िंदगी जी किस आधार पर रहे हो?

ज़िंदगी जी  किस आधार पर रहे हो?


जीवन में भी कोई विशेष कर्म पाप नहीं कहला सकता और कोई विशिष्ट कर्म पुण्य भी नहीं कहला सकता। 

सही -गलत का ,अच्छे -बुरे का ,पाप -पुण्य का निर्धारण बस एक बात करती है की शिव से निकला है कर्म या नहीं निकला ,सच्चाई से निकला है या नहीं निकला। 

सच्चाई से अगर नहीं उद्भूत होगा हमारा कर्म ,हमारा जीवन ,तो फिर वो कहा से संचालित हो रहा होगा ?

सच से नहीं चल रहा तो झूठ से चल रहा होगा। 

तो झूठ माने क्या ? डर ,बेचैनी ,लोभ ,भय ,ईर्ष्या ,भ्रम। 

यही देखना है। 

यही सन्देश है नवरात्रि का की -ज़िंदगी जी किस  आधार पर रहे हो ?

कर्म नहीं ,बाहरी बात नहीं ,रूप -रंग कलेवर नहीं ;मर्म ,आधार। 

किस आधार पर जी रहे हो ?

शिव के आधार  पर  जी रहे हो या शव के आधार पर जी रहे हो ?

सत्य के आधार पर जी जी रहे हो या भ्रम और मोह और अँधेरे में ही जिए जा रहे हो ?

 

Monday, October 4, 2021

सम्बन्ध हर्ष से निकले ,अकेलेपन से नहीं।


                          सम्बन्ध हर्ष से निकले ,अकेलेपन से नहीं। 

दूसरे के पास बेशक जाओ। दुसरो के पास जाना ही चाहिए। जीवन सम्बंधित होने का नाम है। 

पर सम्बन्ध किस आधार पर है ?दुःख के आधार पर ,या सुख के ?हमारे सम्बन्ध दुर्भाग्यपूर्ण बात है की -किस आधार पर है ?

''तू भी दुखी ,मै भी दुखी। तू मेरे कंधे पर सिर रख कर रो ,और मै तेरे कंधे पर सिर  रख कर रोता हूँ। ''

हम सब भण्डार है। दुकाने खोल रखी है की आओ ,जितनी बीमारिया चाहिए हमारे पास से ले जाओ और हम बेचने को भी बड़ा उत्सुक है। जिसके पास दुःख है ,वो क्या बेचेगा ?दुःख ही बेचेगा। जो बिलकुल अकेला है ,तन्हा है वो क्या बेचेगा ?वो दुसरो को भी तन्हाई ही देगा। 

पहला कदम है की -सबसे पहले अपने आप को पाना है। सबसे पहले अपने अकेलेपन में खुश होना सीखना है और जब हम अकेलेपन में खुश होना सीख लेंगे तब दुसरो के साथ सम्बन्ध भी बड़े प्यारे बनेंगे। पहले अकेले में ही खुश होना सीखो। निर्भरता हटाओ दुसरो से। जो एकदम खाली है ,कुछ नहीं है करने को ,इधर तुमने फ़ोन मिलाया और वो भी इसी तलाश में था ,वो कहे की बस तेरे जैसे की जरूरत थी। पहले अकेले होना सीखो और फिर दुसरो से सम्बन्ध रखो। 

इसका मतलब ये नहीं की सबसे सम्बन्ध काट लो। कहना बस ये है की सम्बन्ध का आधार बस उचित होना चाहिए। 

ज़िंदगी जी किस आधार पर रहे हो?

ज़िंदगी जी  किस आधार पर रहे हो? जीवन में भी कोई विशेष कर्म पाप नहीं कहला सकता और कोई विशिष्ट कर्म पुण्य भी नहीं कहला सकता।  सही -गलत का ,अच्छ...