ज़िंदगी का सार
मुक्ति से ऊँचा कुछ नहीं होता ,
सच्चाई से बेहतर कुछ नहीं ,
सीधे रहो ,सरल रहो ,खुद से झूठ मत बोलो ,
न किसी की ज़िन्दगी पर चढ़ो ,
न किसी को अपनी ज़िन्दगी पर चढ़ने का मौका दो। https://jkverma1988.blogspot.com
ज़िंदगी का सार
मुक्ति से ऊँचा कुछ नहीं होता ,
सच्चाई से बेहतर कुछ नहीं ,
सीधे रहो ,सरल रहो ,खुद से झूठ मत बोलो ,
न किसी की ज़िन्दगी पर चढ़ो ,
न किसी को अपनी ज़िन्दगी पर चढ़ने का मौका दो। https://jkverma1988.blogspot.com
ज़िंदगी जी किस आधार पर रहे हो? जीवन में भी कोई विशेष कर्म पाप नहीं कहला सकता और कोई विशिष्ट कर्म पुण्य भी नहीं कहला सकता। सही -गलत का ,अच्छ...
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