Tuesday, September 28, 2021

जहरीला घूंट


                                                            जहरीला घूंट 

दिन -रात ये जो जहरीला मिश्रण हमारे दिमाग में घोला जा रहा है ,उसके विरुद्ध बिलकुल उठ खड़े हो !

वरना पाओगे की जीवन भर  वही हाल रहेगा की अकेले चलने में डर लगता है। 

डर  तो लगेगा ही न ,क्युकी सुबह से शाम तक एक ही घुट्टी पिलाई जा रही -सड़क पर ,स्कूल में ,कॉलेज में ,घर में ,टीवी में,की कोई हमसे ऐसा बात करे तो हमारा सम्मान हुआ ,कोई हमारे लिए ये करे तो हमसे प्यार हुआ। टीवी से ,मीडिया से ,घर से हमें जो विचार ,शब्द मिल रहे है बस उसी के आधार पर हम अपना जीवन चला रहे है। और वास्तव में ये बाहरी मिट्टी -बाहरी शब्द -विचार हटा दे तो हम हीरे है फिर इस हीरे को चमकने के लिए बाहरी कोई चीज़ की जरूरत नहीं। 

खासकर मैं एक बात अनुभव से बोलना चाहूंगा की टीवी में एक सीरियल आती है -''सावधान इंडिया ''ये सीरियल घटना के माध्यम से सतर्क रहना सिखाते है लेकिन हम कई लोग उसे पूरा जीवन ही मान लेते है और हमें पता भी नहीं चलता की मनोरंजन के चक्कर में वो कब मन में घर कर गया फिर कोई आपको थोड़ा सा गुस्सा किये या गुस्से में थोड़ा सा भी शब्दों का उलटफेर हुआ तो समझेंगे ये मुझे धमकी दे रहे है। और टीवी ,मीडिया के कारण आज हर घर में सावधान इंडिया की घटना घटित हो रहा है ,

हमारा खुद की कोई निजता नहीं है। कोई हमारी हर सही ,गलत में हमारे साथ हामी भरे तो वो इंसान हमारे लिए सबसे प्रिय हो जाते है लेकिन सावधान रहे ऐसे लोग से क्युकी आपको जो गलत में आपको सच से परिचित न कराये वो हितैषी आपका नहीं हो सकता और दूसरी चीज़ हम सभी बाहरी शब्द ,विचार को ही सही मानकर चल रहे वो हमें क्या सही गलत बताएंगे।बाहरी चीज़ो से प्रभावित होना छोड़े क्युकी आप फिर हीरा है। 

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Monday, September 27, 2021

ये सवाल कभी ईमानदारी से पूछा ही नहीं

                                  



                                               ये सवाल कभी ईमानदारी से पूछा ही नहीं 

   बुरी से बुरी स्थिति  में भी आप हैरान इसीलिए हो जाते हो क्युकी मन में विचार उठने शुरू हो जाते है उलटे-पुलटे। 

                    विचार न उठे तो स्थिति कैसे भी रहे  फर्क पड़ेगा क्या ?

   मन के मूल्य ठीक करिये। क्या महत्वपूर्ण है ,क्या महत्वपूर्ण नहीं है ,ये हमने ही मन को सिखाया है। 

                                               उसको बदल डालिये। 

         बताइये मन को की कुछ मूल्य नहीं है फ़ालतू की बातो का ,ये करने का ,वो करने का। 

 और थोड़ा सा सतर्क रहिये। क्युकी हमें नहीं पता होता की क्या महत्वपूर्ण है इसीलिए हम सस्ती चीज़ो को महत्वपूर्ण मान लेते है। 

                            रुकिए और पूछिए ये बात ,''क्या महत्वपूर्ण है ?''

Saturday, September 25, 2021

पिंजरा तोड़ सकते हो !अभी!

                       


               

                                             पिंजरा तोड़ सकते हो !अभी!

                                    व्यस्था डंडा दिखाती है ,हम चल देते है। 

                                   समाज डंडा दिखाती है ,हम चल देते है। 

                             टीवी -मीडिया लालच दिखाते है ,हम चल देते है। 

                           पढते भी इन्ही वजहों से है की डर है बेरोजगारी का। 

                    नौकरी भी इसीलिए करते है की दर है बदहाली का। कुछ भी अपनी समझ से होता कहा है ?

                   है ना बड़ी बेचारगी की हालत ?कोई और दुश्मन है नहीं हमारा।

                   हमने खुद अपनी ये हालत कर राखी है ,की हमारा तो एक ही इंजन है -''डर ''

                   हम तो उसी से चलते है। कोई आवश्यक नहीं की जीवन ऐसा हो ,हम सबमे पूरी योग्यता है ,

           पूरी पात्रता है। दूसरे भी इंजन हो सकते ,जीवन दूसरे तरीको से भी जिया जा सकता है और जीना चाहिए। 

जितनी भी दीवारे खड़ी करी है ,हमने खुद कड़ी करी है और वो मानसिक है। उन्हें चलो आज गिरा दे ,अभी गिरा दे। https://jkverma1988.blogspot.com 

Friday, September 24, 2021

क्या सम्बन्धो में कोई आशा रखनी चाहिए

                                       मित्रता बेशर्त होती है 

हेलो दोस्तों ,

                    दोस्तों जैसे हम सभी अपने जीवन में अनुभव करते है की आज तक हम अपने सम्बन्धो में आशा ,उम्मीद रखते है वो कभी पूरा नहीं हुआ और इसी के चलते हमारे सम्बन्धो में हमेशा एक तनाव आया। और वास्तव में सम्बन्धो में आशा रखना प्रेम नहीं है। क्युकी आशा का,उम्मीद का अर्थ होता है - व्यापार। मैंने तुम्हे १० रूपये दिए तो हम उम्मीद रखते है की उसके बदले में तुम मेरी सेवा करोगे या मुझे फलाने किस्म की माल दोगे। हमेशा हमारे सम्बन्धो इसी आशा ,उम्मीदों में टिका होता है और वो पूरा नहीं होने पर हम तनाव में आ जाते है। 

दोस्तों ,

         अब आप लोग बोलोगे की कैसे बिना उम्मीद के जीवन जिए और ये प्रश्न स्वाभाविक है क्युकी बचपन से हमें ख़ुशी की परिभाषा  यही दी गयी है की बाहरी लोगो से,चीज़ो से ही हमें ख़ुशी मिल सकती है। ये बाते मई खुद के अनुभव से बोलना चाहूंगा की जब हम अपने मन में स्पष्टता ले आते है की कभी इन बाहरी लोगो ,चीज़ो से न कभी किसी को न खुशी मिली है और न कभी मिल पायेगी तो जब ये स्पष्ट हो जाती है तो उसी पल आप  उम्मीदों के बोझ से हल्का हो जाते है और फिर उस पल बिना किसी चीज़,लोगो के आप आनंद महसूस करने लगते है। 

                                                                       मैंने तो महसूस किया ये और बहुत अच्छा महसूस होता है ,अब आप लोग की बारी की जीवन भर ऐसे ही उम्मीदों के चक्कर में तनावपूर्ण जीवन जियेंगे या इससे मुक्त होकर मस्तमौला ज़िंदगी जियेंगे। https://jkverma1988.blogspot.com



Wednesday, September 22, 2021

कबीर के दोहों में छिपा जीवन का राज

 

                  कबीर के  दोहों में छिपा जीवन का राज

 

1_ अपने को परखो दूसरों को नहीं

ये दोहा कहता है कि जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा मिला। पर जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है। यानि हमें जजमेंटल नहीं बनना सेल् एनेलेटिकल बनना है। 

2_बात के अर्थ को ग्रहण करें

इस दोहे में कहा गया है कि सज्जन को ऐसा होना चाहिए जैसे अनाज साफ़ करने वाला सूप होता है। जो सार्थक तत् को बचा लेता है और निरर्थक को भूसे के रूप में उड़ा देता है। यानि ज्ञीनी वही है जो बात के महत् को समझे उसके आगे पीछे के विशेषणों से प्रभावित ना हो।

3_कोई भी इंसान छोटा नहीं होता

इस दोहे के अनुसार एक छोटे से तिनके को भी कभी बेकार ना कहो जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब होता है, क्योंकि यदि कभी वह उड़कर आँख में गिरे तो गहरी पीड़ा देता है। यानि कबीर ने स्पष् बताया है कि छोटे बड़े के फेर में ना पड़ें और सभी इंसानों को उनके जाति और कर्म से ऊपर उठ कर सम्मान की दृष्टि से देखें। 

4_संतोषी परम सुखी

कबीर जी कहते हैं इस जीवन में जिस किसी भी व्यक्ति के मन में लोभ नहीं, मोह माया नहीं, जिसको कुछ भी खोने का डर नहीं, जिसका मन जीवन के भोग विलास से बेपरवाह हो वही सही मायने में इस राजा है। मतलब लालच करने वाला कभी ना सुखी होता है ना संतुष् और नाही कामयाब।

5_जीवन का मर्म समझें

मिटटी मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार से कहती है, तू क्या मुझे मसलेगा, एक ऐसा दिन आयेगा जब मैं तुम्हें मसल दूंगी। यह बात बहुत ही ध्यान से समझने की है। जीवन में चाहे इंसान कितना बड़ा आदमी बन जाये अंत में उसे खाक हो कर या दफ्न हो कर मिटटी में ही मिल जाना है।, इसलिए घमंड कभी ना करें। 

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Tuesday, September 21, 2021

ऊर्जा और उत्साह

 ऊर्जा और उत्साह

जीवन में ऊर्जा और उत्साह बनाए रखने के (Energy Channelization) के दो सरल नियम होते हैं

1. 'एनर्जीयानी ऊर्जा बोध के पीछे बहती है। जब तुम कुछ बिलकुल ठीक-ठीक समझ जाते हो तो तुम्हारी ऊर्जा बिलकुल एक धारा में बहने लग जाती है। 

वही एनर्जी पूरे तरीके से नष्ट भी हो सकती है। 

हम सब जानते की एक प्रकार की ऊर्जा दूसरे प्रकार की ऊर्जा में बदल सकती है। 

वही ऊर्जा जो कर्म में बदलती हैवही ऊर्जा गॉसिप में बदल जाती हैआलस में बदल जाती है,  विध्वंसक चीज़ों में चली जाती हैइधर-उधर की बातों में बदल जाती है।

जिन भी लोगों को जीवन में उत्साह चाहिएएनर्जी चाहिएउन्हें उत्साह की फ़िक्र छोड़ देनी चाहिए  और समझने की फ़िक्र करनी चाहिए। उनको ये देखना चाहिए ध्यान से कि, "क्या मैं समझ रहा हूँ कि मेरे साथ क्या हो रहा हैक्या मैं ठीक-ठीक समझ पाया हूँ कि मैं क्या कर  रहा हूँ?  मेरे मन में क्या चल रहा हैक्या मुझे पता है ठीक-ठीक?’’ 

आप आलस की फ़िक्र छोड़ ही दीजिए आप बस ये देखिए कि, "मैं जो कर रहा हूँ,       मुझे उसकी समझ कितनी है।"अगर समझ होगी उससे एनर्जी अपनेआप निकलेगीये पहला नियम हुआ।

2. दूसरा नियम समझोऊर्जा प्रभावों से नष्ट होती जाती है।

अब तुम खुद ही अपनी ज़िन्दगी देख लो कि तुम अपनी ज़िन्दगी में क्या करते हो।  अगर प्रभावों से भरे हो तो तुम्हारी ज़िन्दगी आलस से ही भरी रहेगी। ये देखो कि तुम ज़िन्दगी में जो कुछ भी करते होक्या उसके पीछे तुम्हारी समझ हैऔर  अगर तुम्हारी अपनी समझ से निकलती हो तो आलस का सवाल ही नहीं होता। 

मन एक डस्टबिन बन गया है। समाजपरिवारदोस्तयार सब उसमें आकर के कुछ  कुछ कूड़ा डाल  जाते हैं। कोई तुम्हें कूड़े से थोड़ा सा छुआ भी दे तो तुम उससे कितना लड़ोगे पर तुम्हे यहाँ खबर भी नहीं है कि तुम्हारे दिमाग को कूड़े से भर ही दिया गया है। 

देख रहे हो परिस्थिति क्या है?इसी कूड़े का नाम है बाहरी प्रभाव। इसी से हल्का होना हैयही वो दस टन का बोझ है जो तुम्हारी सारी उर्जा सोखे ले रहा है। इसी से हल्के हो जाओगे तो आलस बिलकुल नहीं बचेगी जीवन में। 

इसी ने तुम्हें भारी कर रखा है। 

अब इसमें एक पेंच है कि तुम्हें कूड़े से प्यार हो गया हैतुम उसे लव लेटर्स लिखते हो। तुमने कूड़े को बड़े प्यारे-प्यारे नाम दे रखे हैंउठ रही है उससे दुर्गंध बिलकुल भयानकपर तुमसे वो कूड़ा छोड़ा नहीं जा रहा। 

मैं नहीं कह रहा तुम जिन लोगों के साथ उठते-बैठते हो उन्हें छोड़ ही दो। लेकिन लोग नहीं बदल सकते पर उनके साथ तुम्हारा सम्बन्ध तो बदल सकता है?

दो लोग वही हैंपर उनके बीच में जो मतलब का सम्बन्ध हैक्या वो प्रेम का सम्बन्ध नहीं हो सकता?

तुम्हारे सम्बन्ध मतलब के सम्बन्ध हैंइसी कारण जीवन पर बोझ हैइसी कारण हालत ऐसी है कि जीवन में कोई ऊर्जा नहींकोई उत्सव नहींकोई उपलब्धि नहीं. 

 

ज़िंदगी जी किस आधार पर रहे हो?

ज़िंदगी जी  किस आधार पर रहे हो? जीवन में भी कोई विशेष कर्म पाप नहीं कहला सकता और कोई विशिष्ट कर्म पुण्य भी नहीं कहला सकता।  सही -गलत का ,अच्छ...