तुम अपना सर्वश्रेष्ठ करो।
उसके बाद तुम जीते तो जीते ,
अगर हारे ,
तो भी वो एक तल पर
जीत से बेहतर होगी।
Very true heart touching knowledge...
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ज़िंदगी जी किस आधार पर रहे हो? जीवन में भी कोई विशेष कर्म पाप नहीं कहला सकता और कोई विशिष्ट कर्म पुण्य भी नहीं कहला सकता। सही -गलत का ,अच्छ...
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Very true heart touching knowledge...
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