Wednesday, September 8, 2021

क्या बांधता है तुम्हे ?क्या रोकता है ?

                       क्या बांधता है तुम्हे ?क्या रोकता है ?

                       बाहर हमने हजार मालिक बना रखे है 

                              ये नहीं कहते की ज़िन्दगी 

                      अपने कृष्ण के मुताबिक बिताऊंगा 

                           मीरा एक कृष्ण की ओर देखती थी ,

                           हजारो से वो नहीं लगे रहती थी ,

                               हमारी ज़िंदगी में हजारो है  

बुझा बुझा मन न खेल पायेगा ,न दौड़ पायेगा ,न पढ़ पायेगा ,न नाच पायेगा। वो बुझा बुझा इसीलिए है क्युकी अपने समझ पर विश्वास नहीं है। हम ये नहीं कहते की अपनी एक चेतना ,एक समझ के आधार पर चलूँगा :हमारे सत्तर मालिक है। दुनिया क्या कर रही है ,उसकी ओर देखते रहते है और उधर को चल देते है। https://jkverma1988.blogspot.com




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