ना प्यार पाते ,ना प्यार समझ पाते
ज़िंदगी भर हम भटकते रहते है प्यार के लिए ,लेकिन न प्यार पाते ,ना प्यार समझ पाते है। एक अनूठे है संत कबीर जिन्होंने बात गहराई से और सफाई से समझा दी है
प्यार क्या है ?
प्रेम प्रेम सब कोई कहे ,प्रेम न जाने कोय
जिस रास्ते मुक्ति मिले ,प्रेम कहावे सोय
(प्यार की बात हर कोई करता है ,जानता कोई नहीं है ,जहा जीवन बन्धनों से मुक्त हो जाता ,वही प्यार है। यहाँ बंधन से मुक्ति का आशय यह है की हम लोभ ,मोह ,काम से मुक्ति मिल जाय और इनसे मुक्ति मिलने के बाद जो आनंद महसूस होता है उसी आनंद को लोगो से बाटना प्यार है। )
प्यार क्या नहीं है ?
झट चढ़े झट उतरे ,सो तो प्रेम न होय
सतत प्रेम मन में बसे ,प्रेम कहावे सोय
(जो उतरता चढ़ता रहता है ,वो प्यार नहीं ,प्यार वो है जो बिना बदले हमेशा मन में बसता है ,लेकिन आज हम प्यार के नाम पे व्यापार करते है ,,यदि हमारे उम्मीद की अनुकूल हुआ तो प्यार नहीं तो प्यार नहीं )
प्यार करने वालो की पहचान क्या?
जब तक मरने से डरे ,तब तक प्रेमी नाही
बड़ी दूर है प्रेम घर ,समझ लियो मन माहि (अगर तुम्हारे दिल में कुछ खो जाने का डर है तो समझ लेना प्यार अभी बहुत दूर है )https://jkverma1988.blogspot.com

3 comments:
Bahut badiya verma ji
✌️
👌👌👌👌👆
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