ये सवाल कभी ईमानदारी से पूछा ही नहीं
बुरी से बुरी स्थिति में भी आप हैरान इसीलिए हो जाते हो क्युकी मन में विचार उठने शुरू हो जाते है उलटे-पुलटे।
विचार न उठे तो स्थिति कैसे भी रहे फर्क पड़ेगा क्या ?
मन के मूल्य ठीक करिये। क्या महत्वपूर्ण है ,क्या महत्वपूर्ण नहीं है ,ये हमने ही मन को सिखाया है।
उसको बदल डालिये।
बताइये मन को की कुछ मूल्य नहीं है फ़ालतू की बातो का ,ये करने का ,वो करने का।
और थोड़ा सा सतर्क रहिये। क्युकी हमें नहीं पता होता की क्या महत्वपूर्ण है इसीलिए हम सस्ती चीज़ो को महत्वपूर्ण मान लेते है।
रुकिए और पूछिए ये बात ,''क्या महत्वपूर्ण है ?''

4 comments:
बहुत सही बात है
Nice
Bahut sunder line
Good
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