Monday, September 27, 2021

ये सवाल कभी ईमानदारी से पूछा ही नहीं

                                  



                                               ये सवाल कभी ईमानदारी से पूछा ही नहीं 

   बुरी से बुरी स्थिति  में भी आप हैरान इसीलिए हो जाते हो क्युकी मन में विचार उठने शुरू हो जाते है उलटे-पुलटे। 

                    विचार न उठे तो स्थिति कैसे भी रहे  फर्क पड़ेगा क्या ?

   मन के मूल्य ठीक करिये। क्या महत्वपूर्ण है ,क्या महत्वपूर्ण नहीं है ,ये हमने ही मन को सिखाया है। 

                                               उसको बदल डालिये। 

         बताइये मन को की कुछ मूल्य नहीं है फ़ालतू की बातो का ,ये करने का ,वो करने का। 

 और थोड़ा सा सतर्क रहिये। क्युकी हमें नहीं पता होता की क्या महत्वपूर्ण है इसीलिए हम सस्ती चीज़ो को महत्वपूर्ण मान लेते है। 

                            रुकिए और पूछिए ये बात ,''क्या महत्वपूर्ण है ?''

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