पिंजरा तोड़ सकते हो !अभी!
व्यस्था डंडा दिखाती है ,हम चल देते है।
समाज डंडा दिखाती है ,हम चल देते है।
टीवी -मीडिया लालच दिखाते है ,हम चल देते है।
पढते भी इन्ही वजहों से है की डर है बेरोजगारी का।
नौकरी भी इसीलिए करते है की दर है बदहाली का। कुछ भी अपनी समझ से होता कहा है ?
है ना बड़ी बेचारगी की हालत ?कोई और दुश्मन है नहीं हमारा।
हमने खुद अपनी ये हालत कर राखी है ,की हमारा तो एक ही इंजन है -''डर ''
हम तो उसी से चलते है। कोई आवश्यक नहीं की जीवन ऐसा हो ,हम सबमे पूरी योग्यता है ,
पूरी पात्रता है। दूसरे भी इंजन हो सकते ,जीवन दूसरे तरीको से भी जिया जा सकता है और जीना चाहिए।
जितनी भी दीवारे खड़ी करी है ,हमने खुद कड़ी करी है और वो मानसिक है। उन्हें चलो आज गिरा दे ,अभी गिरा दे। https://jkverma1988.blogspot.com

2 comments:
Bhut Sundar msg and bhut Sundar presentation
बहुत ही सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश बहुत सही बात है
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