तुम जितने ऊँचे उठते जाओगे ,
दुनिया को देखने का तुम्हारा नजरिया उतना ही साफ़ होता जायेगा।
ऊँचा उठने का अर्थ यहाँ पे खूब पैसे कमाने से नहीं है बल्कि आत्मबल और मन शुद्धि से है।
ज़िंदगी जी किस आधार पर रहे हो? जीवन में भी कोई विशेष कर्म पाप नहीं कहला सकता और कोई विशिष्ट कर्म पुण्य भी नहीं कहला सकता। सही -गलत का ,अच्छ...
1 comment:
True
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