मित्रता बेशर्त होती है
हेलो दोस्तों ,
दोस्तों जैसे हम सभी अपने जीवन में अनुभव करते है की आज तक हम अपने सम्बन्धो में आशा ,उम्मीद रखते है वो कभी पूरा नहीं हुआ और इसी के चलते हमारे सम्बन्धो में हमेशा एक तनाव आया। और वास्तव में सम्बन्धो में आशा रखना प्रेम नहीं है। क्युकी आशा का,उम्मीद का अर्थ होता है - व्यापार। मैंने तुम्हे १० रूपये दिए तो हम उम्मीद रखते है की उसके बदले में तुम मेरी सेवा करोगे या मुझे फलाने किस्म की माल दोगे। हमेशा हमारे सम्बन्धो इसी आशा ,उम्मीदों में टिका होता है और वो पूरा नहीं होने पर हम तनाव में आ जाते है।
दोस्तों ,
अब आप लोग बोलोगे की कैसे बिना उम्मीद के जीवन जिए और ये प्रश्न स्वाभाविक है क्युकी बचपन से हमें ख़ुशी की परिभाषा यही दी गयी है की बाहरी लोगो से,चीज़ो से ही हमें ख़ुशी मिल सकती है। ये बाते मई खुद के अनुभव से बोलना चाहूंगा की जब हम अपने मन में स्पष्टता ले आते है की कभी इन बाहरी लोगो ,चीज़ो से न कभी किसी को न खुशी मिली है और न कभी मिल पायेगी तो जब ये स्पष्ट हो जाती है तो उसी पल आप उम्मीदों के बोझ से हल्का हो जाते है और फिर उस पल बिना किसी चीज़,लोगो के आप आनंद महसूस करने लगते है।
मैंने तो महसूस किया ये और बहुत अच्छा महसूस होता है ,अब आप लोग की बारी की जीवन भर ऐसे ही उम्मीदों के चक्कर में तनावपूर्ण जीवन जियेंगे या इससे मुक्त होकर मस्तमौला ज़िंदगी जियेंगे। https://jkverma1988.blogspot.com

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