बात समझ में आने के बाद भी जीवन क्यों नहीं बदलता ?
उसकी वजह ये है की हमारे पास समझ तो होती है पर समझ के अलावा भी कोई चीज़ होती है -अतीत।
ये जो अतीत है ये हमारी समझदारी को कर्म में ,जीवन में उतरने नहीं देता। अगर आपके पास सिर्फ समझदारी हो और अतीत न हो तो आज आप बड़े खुले ,मुक्त और निर्भीक तरीके से जियेंगे।
पर हमारे पास तो है लेकिन साथ ही साथ अतीत की याद ,आदतों का जोर ,मोह का बन्धन भी है। वो अतीत गायब नहीं होना चाहता ,वो अतीत अपने आप को गलत नहीं मानना चाहता ,वो अतीत अपने आपको मूल्यहीन नहीं मानना चाहता है ,वो अड़ के खड़ा रहना चाहता है।
इस तरह अतीत समझ को दूषित कर देता। फिर आप समझते बुझते भी सही काम नहीं कर पाते
2 comments:
Good effort
Great work Jitendra...
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