Wednesday, August 25, 2021

मन को कैसे बदले

http://jkverma1988.blogspt.com                                                     मन को कैसे बदले 

हम बड़े विचित्र  लोग है हम कृत्रिम प्रयास करते रहते है मन को ठीक करने के। हम कहते है मूड ख़राब है ,चलो घूमकर आते है !उदासी घेरे हुए है ,अकेलापन है ,चलो फ़ोन उठाकर किसी से बात कर लेते है। 

हम समझे नहीं !हम बहुत सतही निदान कर रहे है ,ये काम नहीं आएगा। थोड़ी देर के लिए भले हमें ये अहसास होता है की मन ठीक हो गया है ,लेकिन मन ठीक नहीं हुआ है। 

हम सब ने बड़े नकली इलाज पकड़ लिए है -

चलो तोडा टीवी देख लेते है ,कही घूम आते है !सफलता की कोशिशें कर लेते है !कई लोग मूड ठीक करने के लिए ये भी करते की -'' आओ खाये खूब सारा !'' औरते शॉपिंग पर निकल पड़ते है।  ज़िंदगी खराब जा रही है ,चलो शादी कर लेते है !

फिर हम कहते है  चलो बच्चा पैदा कर लेते है क्या पता इससे ठीक हो जाये। फिर कहते है अब एक घर खड़ा कर लेते है। ''

ये पागलपन है !कटाई पागलपन है !ये सारे नकली इलाज हम बस इसीलिए पकडे हुए है ताकि सच का सामना न करना पड़े। क्युकी सच डराता है। झूठो को ,नकली को ,अहंकार को  सच खूब डराता है और हमारा जीवन झूठो की एक लम्बी श्रृंखला बन जाता है , और कुछ जीवन में बचता ही नहीं है। 

मन में अगर कुछ गड़बड़ है ,बेचैनी महसूस होती है ,दुःख लगता है ,उलझन रहती है ,तो उसको समझो! इसी समझने का नाम है चेतना। इसी का नाम है होश। होश यही करता है ,वो मन को ही समझ जाता है और मन को समझा नहीं की मन बदल गया।  http://jkverma1988.blogspt.com      

ज़िंदगी जी किस आधार पर रहे हो?

ज़िंदगी जी  किस आधार पर रहे हो? जीवन में भी कोई विशेष कर्म पाप नहीं कहला सकता और कोई विशिष्ट कर्म पुण्य भी नहीं कहला सकता।  सही -गलत का ,अच्छ...