Tuesday, September 21, 2021

ऊर्जा और उत्साह

 ऊर्जा और उत्साह

जीवन में ऊर्जा और उत्साह बनाए रखने के (Energy Channelization) के दो सरल नियम होते हैं

1. 'एनर्जीयानी ऊर्जा बोध के पीछे बहती है। जब तुम कुछ बिलकुल ठीक-ठीक समझ जाते हो तो तुम्हारी ऊर्जा बिलकुल एक धारा में बहने लग जाती है। 

वही एनर्जी पूरे तरीके से नष्ट भी हो सकती है। 

हम सब जानते की एक प्रकार की ऊर्जा दूसरे प्रकार की ऊर्जा में बदल सकती है। 

वही ऊर्जा जो कर्म में बदलती हैवही ऊर्जा गॉसिप में बदल जाती हैआलस में बदल जाती है,  विध्वंसक चीज़ों में चली जाती हैइधर-उधर की बातों में बदल जाती है।

जिन भी लोगों को जीवन में उत्साह चाहिएएनर्जी चाहिएउन्हें उत्साह की फ़िक्र छोड़ देनी चाहिए  और समझने की फ़िक्र करनी चाहिए। उनको ये देखना चाहिए ध्यान से कि, "क्या मैं समझ रहा हूँ कि मेरे साथ क्या हो रहा हैक्या मैं ठीक-ठीक समझ पाया हूँ कि मैं क्या कर  रहा हूँ?  मेरे मन में क्या चल रहा हैक्या मुझे पता है ठीक-ठीक?’’ 

आप आलस की फ़िक्र छोड़ ही दीजिए आप बस ये देखिए कि, "मैं जो कर रहा हूँ,       मुझे उसकी समझ कितनी है।"अगर समझ होगी उससे एनर्जी अपनेआप निकलेगीये पहला नियम हुआ।

2. दूसरा नियम समझोऊर्जा प्रभावों से नष्ट होती जाती है।

अब तुम खुद ही अपनी ज़िन्दगी देख लो कि तुम अपनी ज़िन्दगी में क्या करते हो।  अगर प्रभावों से भरे हो तो तुम्हारी ज़िन्दगी आलस से ही भरी रहेगी। ये देखो कि तुम ज़िन्दगी में जो कुछ भी करते होक्या उसके पीछे तुम्हारी समझ हैऔर  अगर तुम्हारी अपनी समझ से निकलती हो तो आलस का सवाल ही नहीं होता। 

मन एक डस्टबिन बन गया है। समाजपरिवारदोस्तयार सब उसमें आकर के कुछ  कुछ कूड़ा डाल  जाते हैं। कोई तुम्हें कूड़े से थोड़ा सा छुआ भी दे तो तुम उससे कितना लड़ोगे पर तुम्हे यहाँ खबर भी नहीं है कि तुम्हारे दिमाग को कूड़े से भर ही दिया गया है। 

देख रहे हो परिस्थिति क्या है?इसी कूड़े का नाम है बाहरी प्रभाव। इसी से हल्का होना हैयही वो दस टन का बोझ है जो तुम्हारी सारी उर्जा सोखे ले रहा है। इसी से हल्के हो जाओगे तो आलस बिलकुल नहीं बचेगी जीवन में। 

इसी ने तुम्हें भारी कर रखा है। 

अब इसमें एक पेंच है कि तुम्हें कूड़े से प्यार हो गया हैतुम उसे लव लेटर्स लिखते हो। तुमने कूड़े को बड़े प्यारे-प्यारे नाम दे रखे हैंउठ रही है उससे दुर्गंध बिलकुल भयानकपर तुमसे वो कूड़ा छोड़ा नहीं जा रहा। 

मैं नहीं कह रहा तुम जिन लोगों के साथ उठते-बैठते हो उन्हें छोड़ ही दो। लेकिन लोग नहीं बदल सकते पर उनके साथ तुम्हारा सम्बन्ध तो बदल सकता है?

दो लोग वही हैंपर उनके बीच में जो मतलब का सम्बन्ध हैक्या वो प्रेम का सम्बन्ध नहीं हो सकता?

तुम्हारे सम्बन्ध मतलब के सम्बन्ध हैंइसी कारण जीवन पर बोझ हैइसी कारण हालत ऐसी है कि जीवन में कोई ऊर्जा नहींकोई उत्सव नहींकोई उपलब्धि नहीं. 

 

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