Monday, September 20, 2021

पैसे क्या है?

 

पैसे क्या है? (महत्वपूर्ण सूत्र)

पैसा क्या होता है? पैसा तुम्हारे द्वारा संचित श्रम और बौद्धिकता होती है। तुमने मेहनत करी है, वो मेहनत समझ लो जैसे घनीभूत होकर एक मुद्रा का नोट बन गई है।
वो नोट तुम्हें किसलिए मिला है? क्योंकि तुम चैतन्य हो और तुमने चैतन्य हो कर के श्रम करा है। तो उसमें तुम्हारा श्रम और तुम्हारी बुद्धिमता, तुम्हारी सृजनात्मकता सब शामिल हैं तो वो तुमको दे दिया गया है। अब सवाल यह है कि श्रम करना क्यों है?
आदमी अकेला है जो कर्म करता है। कर्म या श्रम करना क्यों है? ज़रूरत यही है कि हम बंधे हुए हैं, बेचैन हैं, परेशान हैं इसलिए श्रम करना है।
तो व्यय का मतलब है श्रम और श्रम होना चाहिए बंधनों को काटने की दिशा में। माने व्यय भी होना चाहिए बंधनों को काटने की दिशा में। इसके लिए एक शब्द का प्रयोग किया जाता है मितव्ययी।

तो मितव्ययी होने का क्या मतलब है?
मितव्ययी का मतलब है उतना खर्च करो, उस दिशा में व्यय करो जिस दिशा में व्यय करने से जीवन सार्थक होता है।

मितव्ययी होने का मतलब है समोसा चालीस रूपए का हो तब भी नहीं लेना है और वो किताब छह-हज़ार रूपए की हो तब भी लेनी है।
सम्यक व्यय करना है, सम्यक व्यय। सही दिशा में पैसा ख़र्च करो और गलत दिशा में एक रुपया भी खर्च नहीं करना है।

"
जहाँ जाना चाहिए वहाँ अगर दस-लाख भी जाना चाहिए तो जाएगा और जिधर नहीं जाना है उधर एक-रुपया भी नहीं जाने दूँगा।"

पैसा ना अच्छा है ना बुरा है - आज़ादी अच्छी है।


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