Tuesday, September 14, 2021

शेरो के झुण्ड नहीं होते है

                                                  शेरो के झुण्ड नहीं  होते है 

हमें भले वही लोग लगने लगे है जो हमें डराए हुए है। देखा है न इस तरह की बाते लिखी हुयी है ''ज़िंदगी एक जंग है ''भविष्य का सामना करने के लिए तैयार रहो ''? 'भविष्य का सामना' माने क्या ?भविष्य में कोई बम धमाके चल रहे है? भविष्य तुम्हे खा जाने का आतुर है ?पर जैसे ही कोई हमसे कहता है की हम तुम्हे भविष्य की सामना करने के लिए तैयार करेंगे तो हम कहते है की ये बढ़िए आदमी है। 

ज़िंदगी की खतरे !हम ये नहीं कहते ''ज़िंदगी का प्रेम ''हम ये भी नहीं कहते की ''ज़िंदगी का उत्सव''। हम ये भी नहीं कहते की ''ज़िंदगी की स्वतंत्रता''. हम कहते है ''ज़िंदगी की खतरे की ''क्युकी डर की ये भाषा हमें बहुत पसंद है। 

बेटा ,अपने भविष्य के बारे में क्या सोचा है ?सोचना शुरू कर दो। अब तुम बड़े हो गए हो। 

यहाँ पर आशय क्या है की सोचो, तैयारी करो ,कुछ ही आगे जो गड़बड़ है। हम सभी देखे की बीमा करने वाली कंपनी हमको बार बार बताती है की डरो और बीमा कराओ ?और हमें लगता है की हमारे हित की बात करी। तो बीमा का विज्ञापन आएगा उसमे एक बड़ी तस्वीर दिखाई जाएगी -जिसमे तुम्हारी बीवी है,बच्चे है.तुम हो फिर दूसरी तरफ एक तस्वीर दिखाई जाएगी जिसमे तुम गायब हो गए और कहा जायेगा की अब कुछ करो और तुम तुरंत जाओगे और बीमा खरीद लोगे। 

डर लगातार बैठाया जा रहा है। पर हम इसे समझेंगे नहीं। हम कहेंगे की हमारे भले की बात करी और जायेंगे और वही एक इत्र खरीद कर ले आएंगे। 

हर उस आवाज को अस्वीकार कर दो जो हमें डराती है। वो आवाज़ हमारा हितैषी नहीं हो सकता। बिलकुल अस्वीकार कर दो।    https://jkverma1988.blogspot.com



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