रक्षाबन्धन को ऊँचे अर्थ दें '
अब समय आ गया है कि स्त्री रक्षा मांगे नहीं ,रक्षा प्रदान करे।
जो स्वयं शक्तिरूपा है ,वो कब तक दुसरो से रक्षा मांगती रहेगी ?
आज पृथ्वी संकट में है ,पशु पंक्षी संकट में है ,
मानव संकट में है,और सत्य संकट में है है।
पुरुष के साथ -साथ स्त्री का भी दायित्व है कि
इस रक्षाबन्धन पर संकल्प ले हारती हुयी सच्चाई की रक्षा करने का।
2 comments:
Nice post happy rakhshabandhan
Nice sir ji
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