Monday, August 23, 2021

AKELE CHALNE ME DAR KYU LAGTA HAI.

नीचे जो लाइन लिखी गयी ही उसे अन्य प्रेरणादायक विचार समझ के छोड़ न दे। ये आज की भागम भाग की ज़िंदगी और बस किसी चीज़ और इंसान में खुशी ,शान्ति  पाने की दौड़ में है है जो आज तक करोड़पति और अरबपति को भी स्थायी खुशी नहीं मिल पाया लेकिन यकीं करे इस लाइन के लिए आपके व्यस्त जीवन से समय निकालकर थोड़ा  गौर करे तो आपको कुछ न कुछ नया रास्ता मिलेगा।  

तुम्हारे मन में धारणाये हमेशा यही डाली गयी है। उदहारण के लिए  तुम्हे बचपन से बता दिया गया की मनुष्य एक सामाजिक पशु है। 
अब दो तरफा तुम पर चोट की गयी है। 
पहले तो तुम्हे बोला गया की तुम पशु हो। पशु शब्द आता है उसी धातु से जहाँ से पाश आता है -पाश माने बन्धन। तो पहली बात तो ये की तुम्हे बोल दिया गया है की बंधे रहना तुम्हारा स्वाभाव है। शारीरिक रूप से तुम्हे पशु घोषित कर दिया गया की तुम सामाजिक हो। तुम सामाजिक नहीं हो ही नहीं ;न तुम सामाजिक हो ,न तुम शारीरिक हो। 
पर तुम्हे बार बार पट्टी यही पढाई गयी है तो मन इतनी बुरी तरह इन सब बातो से दब गया है की जैसे हीरा हो ,हुए उसके ऊपर टनो राख डाल दी जाए तो हीरा कही दिखाई न पड़े ,कही प्रकट न हो। ऐसी तुम्हारी हालत हो गयी है। 
हीरे तो हम सभी है ,इसमें कई शक नहीं है ,पर राख हमारे ऊपर टनो पड़ी है। वो राख ही हमारा बोझ है ,उसी से मुक्त होना है। कुछ पाना नहीं है ,बस मुक्त होना है उसी से। 
इसीलिए पाने की कोशिश छोडो ,जो पहले ही इकठ्ठा कर रखा है ,बस उसी को साफ़ करो। पाने की सारी कोशिश खराब है। लेकिन हम पड़े रहते है 'कुछ पाने की फेर में 'हम कहते है ''अभी कुछ और पाना है''। अभी पा पाकर तृप्त नहीं हुए ?पा पाकर ये हमारी गत बन गयी है। अभी पूरी नहीं पड़ रही ?पाना छोडो !अब हमारा समय है हल्का होने का। पाने का अर्थ है और बोझ इकठ्ठा करना। ये साड़ी बाते की-''दूसरे आवश्यक है '', ''बैसाखिया चाहिए'', ''कोई दूसरा रास्ता दिखायेगा , ''मार्गदर्शक हो कोई '' अरे अपना कोई रास्ता होता है !कोई हो जो रोशनी डाले ,कोई हो जो बताये की जीवन क्या होता है। ये सारी बाते बस धारणाये है। हमें अधूरा नहीं बनाया गया है कोई भी अधूरा नहीं बनाया गया है सब अपने आप में सम्पूर्ण है। 
सम्बन्ध होने चाहिए कोई शक नहीं है ,रिश्ते होने चाहिए ,पर वो रिश्ते अपूर्णता के नहीं होते। मै अधूरा हु ,तुम भी अधूरे हो ,चलो मिलकर पुरे हो जाये - इससे कोई पुरापन नहीं आता। 
तुम भी पुरे हो, वो भी पुरे है और इसी पूरेपन में रिश्ता बनता है असली। इस पूरेपन मे ही असली रिश्ता बनता है। 















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ज़िंदगी जी  किस आधार पर रहे हो? जीवन में भी कोई विशेष कर्म पाप नहीं कहला सकता और कोई विशिष्ट कर्म पुण्य भी नहीं कहला सकता।  सही -गलत का ,अच्छ...